बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहत सुनत सुमिरत सुठि नीके। राम लखन सम प्रिय तुलसी के।।
मूल पाठ
कहत सुनत सुमिरत सुठि नीके। राम लखन सम प्रिय तुलसी के।।
बरनत बरन प्रीति बिलगाती। ब्रह्म जीव सम सहज सँघाती।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 42, 42
भावार्थ
मूल पाठ के बादये कहने, सुनने और स्मरण करनेमें बहुत ही अच्छे (सुन्दर और मधुर) हैं; तुलसीदासको तो श्रीराम-लक्ष्मणके समान प्यारे हैं। इनका ('र और 'म का) अलग-अलग वर्णन करनेमें प्रीति बिलगाती है (अर्थात् बीजमन्त्रकी दृष्टिसे इनके उच्चारण, अर्थ और फलमें भिन्नता दीख पड़ती है) परन्तु हैं ये जीव और ब्रह्मके समान स्वभावसे ही साथ रहनेवाले (सदा एकरूप और एकरस)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 42 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहत सुनत सुमिरत सुठि नीके। राम लखन सम प्रिय तुलसी के।।
English explanation
They are exceedingly pleasing to utter, hear, and remember; they are as dear to Tulsidas as Rama and Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहने में | in uttering |
| सुनत | सुनने में | in hearing |
| सुमिरत | स्मरण करने में | in remembering |
| सुठि | अत्यंत | exceedingly |
| नीके | अच्छे और प्रिय लगने वाले | pleasing |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| लखन | राम के भाई लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| सम | के समान | like |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| के | को | to |
2 बरनत बरन प्रीति बिलगाती। ब्रह्म जीव सम सहज सँघाती।।
English explanation
Describing these letters reveals distinct expressions of affection; yet they are natural companions, like Brahman and the individual soul.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनत | वर्णन करने पर | when described |
| बरन | अक्षरों का | of the letters |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| बिलगाती | अलग-अलग प्रकट होता है | appears distinct |
| ब्रह्म | परम सत्य ब्रह्म | Brahman, the supreme reality |
| जीव | व्यक्तिगत आत्मा | the individual soul |
| सम | के समान | like |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| सँघाती | साथी | companions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 42
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 42, 42
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।