बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आखर मधुर मनोहर दोऊ। बरन बिलोचन जन जिय जोऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददोनों अक्षर मधुर और मनोहर हैं, जो वर्णमालारूपी शरीरके नेत्र हैं, भक्तोंके जीवन हैं तथा स्मरण करनेमें सबके लिये सुलभ और सुख देनेवाले हैं, और जो इस लोकमें लाभ और परलोकमें निर्वाह करते हैं (अर्थात् भगवान्के दिव्य धाममें दिव्य देहसे सदा भगवत्सेवामें नियुक्त रखते हैं)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 42 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आखर मधुर मनोहर दोऊ। बरन बिलोचन जन जिय जोऊ।।
सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू। लोक लाहु परलोक निबाहू।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 42, 42
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आखर मधुर मनोहर दोऊ। बरन बिलोचन जन जिय जोऊ।।
English explanation
AI-draft interpretation: The two letters of Rama’s name are sweet and lovely; they are the eyes of the devotees’ hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आखर | अक्षर | letters |
| मधुर | मधुर | sweet |
| मनोहर | मन को हरने वाले | captivating |
| दोऊ | दोनों | both |
| बरन | अक्षर | letters |
| बिलोचन | नेत्र | eyes |
| जन | भक्तों के | of devotees |
| जिय | हृदय के | of the heart |
| जोऊ | दोनों | the pair |
2 सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू। लोक लाहु परलोक निबाहू।।
English explanation
When remembered, they are accessible and bring happiness to everyone; they bring benefit in this world and sustain one in the next.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरत | स्मरण करने पर | when remembered |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily accessible |
| सुखद | सुख देने वाले | happiness-giving |
| सब | सब | every |
| काहू | किसी को | person |
| लोक | इस संसार में | in this world |
| लाहु | लाभ | benefit |
| परलोक | परलोक में | in the next world |
| निबाहू | साथ निभाने वाले | sustaining support |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 42
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 42, 42
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।