बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहउँ कथा सोइ सुखद सुहाई। सादर सुनहु सुजन मन लाई।।
मूल पाठ
कहउँ कथा सोइ सुखद सुहाई। सादर सुनहु सुजन मन लाई।।
स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 57, 58
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं उसी सुख देनेवाली सुहावनी रामकथाको कहता हूँ, हे सज्जनो! आदरपूर्वक मन लगाकर इसे सुनिये॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 58 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहउँ कथा सोइ सुखद सुहाई। सादर सुनहु सुजन मन लाई।।
English explanation
I tell that same delightful and beautiful story; good people, listen respectfully and attentively.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I tell |
| कथा | कथा | story |
| सोइ | वही | that very |
| सुखद | सुख देने वाली | giving delight |
| सुहाई | सुंदर; मनभावनी | beautiful |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| सुजन | हे सज्जनो | good people |
| मन | मन; ध्यान | mind or attention |
| लाई | लगाकर | applying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 58
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 57, 58
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।