बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रेष्ठ विज्ञानी मुनि विश्वामित्रजी भोजन करके कुछ प्राचीन कथाएँ कहने लगे। [इतनेमें] दिन बीत गया और गुरुकी आज्ञा पाकर दोनों भाई सन्ध्या करने चले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 232 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी।।
बिगत दिवसु गुरु आयसु पाई। संध्या करन चले दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 1.237 · पुस्तक पृ. 231, 232
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी।।
English explanation
After eating, the wise, eminent sage began telling some ancient tales.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having taken |
| भोजनु | भोजन | a meal |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि विश्वामित्र | the eminent sage Vishvamitra |
| बिग्यानी | ज्ञानी | wise |
| लगे | लगे | began |
| कहन | कहने | to tell |
| कछु | कुछ | some |
| कथा | कथाएँ | tales |
| पुरानी | पुरानी | ancient |
2 बिगत दिवसु गुरु आयसु पाई। संध्या करन चले दोउ भाई।।
English explanation
When the day had passed, both brothers obtained their teacher’s permission and went to perform evening prayers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिगत | बीत गया | having passed |
| दिवसु | दिन | the day |
| गुरु | गुरु विश्वामित्र की | their teacher Vishvamitra’s |
| आयसु | आज्ञा, अनुमति | permission |
| पाई | पाकर | having obtained |
| संध्या | संध्या-वंदन | evening ritual prayers |
| करन | करने | to perform |
| चले | चले | went |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.237
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 232
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 231, 232
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।