बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्राची दिसि ससि उयउ सुहावा। सिय मुख सरिस देखि सुखु पावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[उधर] पूर्व दिशामें सुन्दर चन्द्रमा उदय हुआ। श्रीरामचन्द्रजीने उसे सीताके मुखके समान देखकर सुख पाया। फिर मनमें विचार किया कि यह चन्द्रमा सीताजीके मुखके समान नहीं है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 232 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्राची दिसि ससि उयउ सुहावा। सिय मुख सरिस देखि सुखु पावा।।
बहुरि बिचारु कीन्ह मन माहीं। सीय बदन सम हिमकर नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.237 · पुस्तक पृ. 231, 232
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्राची दिसि ससि उयउ सुहावा। सिय मुख सरिस देखि सुखु पावा।।
English explanation
The lovely moon rose in the east. Seeing it as resembling Sita’s face, Rama felt joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्राची | पूर्व | eastern |
| दिसि | दिशा में | in the direction |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| उयउ | उदित हुआ | rose |
| सुहावा | सुंदर | lovely |
| सिय | सीता के | Sita’s |
| मुख | मुख | face |
| सरिस | के समान | like |
| देखि | देखकर | seeing |
| सुखु | सुख | joy |
| पावा | पाया | felt |
2 बहुरि बिचारु कीन्ह मन माहीं। सीय बदन सम हिमकर नाहीं।।
English explanation
Then Rama reflected inwardly that the moon was not equal to Sita’s face.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| बिचारु | विचार | reflection |
| कीन्ह | किया | made |
| मन | मन | the mind |
| माहीं | में | within |
| सीय | सीता के | Sita’s |
| बदन | मुख | face |
| सम | के समान | equal to |
| हिमकर | चंद्रमा | the moon, giver of cool rays |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.237
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 232
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 231, 232
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।