बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशिव-पार्वती विविध प्रकारके भोग-विलास करते हुए अपने गणोंसहित कैलासपर रहने लगे। वे नित्य नये विहार करते थे। इस प्रकार बहुत समय बीत गया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 117 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा।।
हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.103 · पुस्तक पृ. 117, 118
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा।।
English explanation
They enjoy pleasures and recreation in various ways and dwell on Kailasa with their attendants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | engage in |
| बिबिध | विभिन्न | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| भोग | सुखों का उपभोग | enjoyment of pleasures |
| बिलासा | विहार | recreation |
| गनन्ह | शिव के गणों के | Shiva’s attendants |
| समेत | साथ | with |
| बसहिं | रहते हैं | dwell |
| कैलासा | कैलास में | on Mount Kailasa |
2 हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ।।
English explanation
Shiva and Parvati’s recreation was ever fresh; in this way, a long time passed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हर | शिव | Shiva |
| गिरिजा | पर्वतपुत्री पार्वती | Parvati, daughter of the mountain |
| बिहार | विहार | recreation together |
| नित | नित्य | ever |
| नयऊ | नया | fresh |
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| बिपुल | बहुत | a great length of |
| काल | समय | time |
| चलि | बीतता हुआ | passing |
| गयऊ | गया | went by |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.103
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 117
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 117, 118
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।