बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा।।
मूल पाठ
करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा।।
जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई। थकित होहिं सब लोग लुगाई।।
स्रोत अभिलेख 1.204 · पुस्तक पृ. 203, 203
भावार्थ
मूल पाठ के बादहाथोंमें बाण और धनुष बहुत ही शोभा देते हैं। रूप देखते ही चराचर (जड-चेतन) मोहित हो जाते हैं। वे सब भाई जिन गलियोंमें खेलते [हुए निकलते] हैं, उन गलियोंके सभी स्त्री-पुरुष उनको देखकर स्नेहसे शिथिल हो जाते हैं अथवा ठिठककर रह जाते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 203 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा।।
English explanation
The arrows and bow look splendid in their hands; beholding their beauty, the entire moving and unmoving world is enchanted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करतल | हथेलियों में, हाथों में | in their hands |
| बान | बाण | arrows |
| धनुष | धनुष | bow |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सोहा | शोभते हैं | look splendid |
| देखत | देखते ही | on beholding |
| रूप | सुंदर रूप | beauty of form |
| चराचर | चल और अचल समस्त जगत | the whole moving and unmoving world |
| मोहा | मोहित हो जाता है | is enchanted |
2 जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई। थकित होहिं सब लोग लुगाई।।
English explanation
In whichever streets all the brothers wander, all the men and women become spellbound.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन | whichever |
| बीथिन्ह | गलियों में | in the streets |
| बिहरहिं | विचरते हैं | wander |
| सब | सभी | all |
| भाई | भाई | brothers |
| थकित | स्तब्ध, विस्मय से ठिठके | spellbound; transfixed |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| सब | सभी | all |
| लोग | पुरुष | men |
| लुगाई | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.204
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 203
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 203, 203
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।