बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कबित बिबेक एक नहिं मोरें। सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे।।
मूल पाठ
कबित बिबेक एक नहिं मोरें। सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे।।
स्रोत अभिलेख 1.9 · पुस्तक पृ. 29, 30
भावार्थ
मूल पाठ के बादइनमेंसे काव्यसम्बन्धी एक भी बातका ज्ञान मुझमें नहीं है, यह मैं कोरे कागजपर लिखकर [शपथपूर्वक] सत्य-सत्य कहता हूँ॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 30 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कबित बिबेक एक नहिं मोरें। सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे।।
English explanation
I possess not even a single measure of poetic discernment; I state this truth in writing on blank paper.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबित | काव्य का | of poetry |
| बिबेक | विवेक; परख | discernment |
| एक | एक भी अंश | even a single measure |
| नहिं | नहीं है | there is none |
| मोरें | मुझमें | in me |
| सत्य | सच | the truth |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I state |
| लिखि | लिखकर | in writing |
| कागद | कागज पर | on paper |
| कोरे | कोरे | blank |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 30
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 29, 30
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।