बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा।।
मूल पाठ
कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा।।
बंदउँ सब के चरन सुहाए। अधम सरीर राम जिन्ह पाए।।
स्रोत अभिलेख 1.18 · पुस्तक पृ. 40, 40
भावार्थ
मूल पाठ के बादवानरोंके राजा सुग्रीवजी, रीछोंके राजा जाम्बवान्जी, राक्षसोंके राजा विभीषणजी और अंगदजी आदि जितना वानरोंका समाज है, सबके सुन्दर चरणोंकी मैं वन्दना करता हूँ, जिन्होंने अधम (पशु और राक्षस आदि) शरीरमें भी श्रीरामचन्द्रजीको प्राप्त कर लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 40 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा।।
English explanation
AI draft: Sugriva, king of the monkeys; Jambavan, king of the bears; Vibhishana, king of the demons; and the monkey host including Angada—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपिपति | वानरों के स्वामी सुग्रीव | Sugriva, lord of the monkeys |
| रीछ | रीछ; यहाँ रीछराज जाम्बवान | bear; here Jambavan, lord of the bears |
| निसाचर | राक्षसों के | of the demons |
| राजा | राजा विभीषण | King Vibhishana |
| अंगदादि | अंगद और अन्य | Angada and others |
| जे | जो | who |
| कीस | वानरों का | of monkeys |
| समाजा | समुदाय | host or company |
2 बंदउँ सब के चरन सुहाए। अधम सरीर राम जिन्ह पाए।।
English explanation
I bow to the beautiful feet of all these, who attained Rama even in bodies regarded as lowly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं वंदना करता हूँ | I bow in reverence |
| सब | सभी | all |
| के | के | of |
| चरन | चरण | feet |
| सुहाए | सुंदर | beautiful |
| अधम | अधम माने गए | regarded as lowly |
| सरीर | शरीरों में | in bodies |
| राम | भगवान राम को | Lord Rama |
| जिन्ह | जिन्होंने | who |
| पाए | प्राप्त किया | attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 40
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 40, 40
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।