बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कनक कलस भरि कोपर थारा। भाजन ललित अनेक प्रकारा।।
मूल पाठ
कनक कलस भरि कोपर थारा। भाजन ललित अनेक प्रकारा।।
भरे सुधासम सब पकवाने। नाना भाँति न जाहिं बखाने।।
स्रोत अभिलेख 1.305 · पुस्तक पृ. 287, 288
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[दूध, शर्बत, ठंढाई, जल आदिसे] भरकर सोनेके कलश तथा जिनका वर्णन नहीं हो सकता ऐसे अमृतके समान भाँति-भाँतिके सब पकवानोंसे भरे हुए परात, थाल आदि अनेक प्रकारके सुन्दर बर्तन,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 287 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कनक कलस भरि कोपर थारा। भाजन ललित अनेक प्रकारा।।
English explanation
Golden pitchers, large bowls, platters, and many kinds of lovely vessels were filled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनक | सोने के | golden |
| कलस | कलश | pitchers |
| भरि | भरकर | having filled |
| कोपर | बड़े कटोरे या परात | large bowls or shallow basins |
| थारा | थाल | platters |
| भाजन | पात्र | vessels |
| ललित | सुंदर | lovely |
| अनेक | अनेक | many |
| प्रकारा | प्रकार के | of various kinds |
2 भरे सुधासम सब पकवाने। नाना भाँति न जाहिं बखाने।।
English explanation
All the vessels were filled with nectar-like delicacies, whose many varieties cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरे | भरे हुए थे | were filled |
| सुधासम | अमृत के समान | like nectar |
| सब | सभी | all |
| पकवाने | पकवानों से | with prepared delicacies |
| नाना | अनेक | numerous |
| भाँति | प्रकार | varieties |
| न | नहीं | not |
| जाहिं | जा सकते | can be |
| बखाने | वर्णन किए | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.305
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 287
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 287, 288
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।