बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कंचन थार सोह बर पानी। परिछन चली हरहि हरषानी।।
मूल पाठ
कंचन थार सोह बर पानी। परिछन चली हरहि हरषानी।।
बिकट बेष रुद्रहि जब देखा। अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा।।
स्रोत अभिलेख 1.96 · पुस्तक पृ. 110, 111
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुन्दर हाथोंमें सोनेका थाल शोभित है, इस प्रकार मैना हर्षके साथ शिवजीका परछन करने चलीं। जब महादेवजीको भयानक वेषमें देखा तब तो स्त्रियोंके मनमें बड़ा भारी भय उत्पन्न हो गया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 110 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1कंचन थार सोह बर पानी। परिछन चली हरहि हरषानी।।
English explanation
A golden tray shone in her lovely hand; joyfully she went to perform the welcoming rite for Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंचन | सोने का | golden |
| थार | थाल | tray |
| सोह | शोभित है | shines beautifully |
| बर | सुंदर | lovely |
| पानी | हाथ में | in her hand |
| परिछन | वर के स्वागत का परिछन करने | to perform the bridegroom’s welcoming rite |
| चली | चलीं | went |
| हरहि | शिव का | for Shiva |
| हरषानी | प्रसन्न होकर | joyfully |
2बिकट बेष रुद्रहि जब देखा। अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा।।
English explanation
When the women saw Shiva in his fearsome attire, great fear arose in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिकट | भयानक | fearsome |
| बेष | वेश, रूप | attire and appearance |
| रुद्रहि | रुद्र शिव को | Shiva, the fierce Rudra |
| जब | जब | when |
| देखा | देखा | saw |
| अबलन्ह | स्त्रियों के | of the women |
| उर | हृदयों में | in the hearts |
| भय | भय | fear |
| भयउ | उत्पन्न हुआ | arose |
| बिसेषा | बहुत अधिक | very great |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.96
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 110
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 110, 111
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।