बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ए प्रिय सबहि जहाँ लगि प्रानी। मन मुसुकाहिं रामु सुनि बानी।।
मूल पाठ
ए प्रिय सबहि जहाँ लगि प्रानी। मन मुसुकाहिं रामु सुनि बानी।।
रघुकुल मनि दसरथ के जाए। मम हित लागि नरेस पठाए।।
स्रोत अभिलेख 1.216 · पुस्तक पृ. 214, 214
भावार्थ
मूल पाठ के बादजगत्में जहाँतक (जितने भी) प्राणी हैं, ये सभीको प्रिय हैं। मुनिकी [रहस्यभरी] वाणी सुनकर श्रीरामजी मन-ही-मन मुसकराते हैं (हँसकर मानो संकेत करते हैं कि रहस्य खोलिये नहीं)। [तब मुनिने कहा—] ये रघुकुलमणि महाराज दशरथके पुत्र हैं। मेरे हितके लिये राजाने इन्हें मेरे साथ भेजा है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 214 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 ए प्रिय सबहि जहाँ लगि प्रानी। मन मुसुकाहिं रामु सुनि बानी।।
English explanation
‘These two are dear to every living being.’ Hearing these words, Rama smiles inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ए | ये दोनों | these two |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| सबहि | सभी को | to everyone |
| जहाँ | जहाँ तक | wherever |
| लगि | तक | as far as |
| प्रानी | प्राणी हैं | living beings exist |
| मन | मन ही मन | inwardly |
| मुसुकाहिं | मुस्कराते हैं | smiles |
| रामु | श्रीराम | Rama, son of Dasharatha |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| बानी | वाणी | these words |
2 रघुकुल मनि दसरथ के जाए। मम हित लागि नरेस पठाए।।
English explanation
They are jewels of Raghu’s lineage, sons of Dasharatha. The king sent them for my benefit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुकुल | रघु के वंश के | of Raghu’s lineage |
| मनि | रत्न | jewels |
| दसरथ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| के | के | of |
| जाए | पुत्र | sons |
| मम | मेरे | my |
| हित | कल्याण | benefit |
| लागि | के लिए | for |
| नरेस | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| पठाए | भेजे हैं | sent them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.216
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 214
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
- मुद्रित पृष्ठ
- 214, 214
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।