बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इन्हहि बिलोकत अति अनुरागा। बरबस ब्रह्मसुखहि मन त्यागा।।
मूल पाठ
इन्हहि बिलोकत अति अनुरागा। बरबस ब्रह्मसुखहि मन त्यागा।।
कह मुनि बिहसि कहेहु नृप नीका। बचन तुम्हार न होइ अलीका।।
स्रोत अभिलेख 1.216 · पुस्तक पृ. 214, 214
भावार्थ
मूल पाठ के बादइनको देखते ही अत्यन्त प्रेमके वश होकर मेरे मनने जबर्दस्ती ब्रह्मसुखको त्याग दिया है। मुनिने हँसकर कहा—हे राजन्! आपने ठीक (यथार्थ ही) कहा। आपका वचन मिथ्या नहीं हो सकता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 214 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 इन्हहि बिलोकत अति अनुरागा। बरबस ब्रह्मसुखहि मन त्यागा।।
English explanation
Seeing them awakens such intense affection that my mind involuntarily relinquishes even the bliss of Brahman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इन्हहि | इन्हीं दोनों को | these two |
| बिलोकत | देखते हुए | on seeing |
| अति | अत्यंत | intense |
| अनुरागा | प्रेम | affection |
| बरबस | अनायास, विवश होकर | involuntarily |
| ब्रह्मसुखहि | ब्रह्मानंद को | the bliss of Brahman |
| मन | मन ने | the mind |
| त्यागा | त्याग दिया | relinquished |
2 कह मुनि बिहसि कहेहु नृप नीका। बचन तुम्हार न होइ अलीका।।
English explanation
The sage smiled and said, ‘O king, you have spoken well; your words are not false.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र ने | the sage Vishvamitra |
| बिहसि | मुस्कराकर | smiling |
| कहेहु | आपने कहा | you have spoken |
| नृप | हे राजन् | O king |
| नीका | ठीक, अच्छा | well, rightly |
| बचन | वचन | words |
| तुम्हार | आपके | your |
| न | नहीं | not |
| होइ | हैं | are |
| अलीका | असत्य | false |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.216
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 214
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
- मुद्रित पृष्ठ
- 214, 214
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।