बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि महँ रघुपति नाम उदारा। अति पावन पुरान श्रुति सारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइसमें श्रीरघुनाथजीका उदार नाम है, जो अत्यन्त पवित्र है, वेद-पुराणोंका सार है, कल्याणका भवन है और अमङ्गलोंको हरनेवाला है, जिसे पार्वतीजीसहित भगवान् शिवजी सदा जपा करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 30 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि महँ रघुपति नाम उदारा। अति पावन पुरान श्रुति सारा।।
मंगल भवन अमंगल हारी। उमा सहित जेहि जपत पुरारी।।
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 30, 31
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि महँ रघुपति नाम उदारा। अति पावन पुरान श्रुति सारा।।
English explanation
This composition contains the noble name of Rama, supremely purifying and the essence of the Puranas and Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस रचना में संकेतित ‘इस’ | this composition |
| महँ | में | in |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| नाम | नाम | name |
| उदारा | उदार, महान | noble, exalted |
| अति | अत्यंत | supremely |
| पावन | पवित्र करने वाला | purifying |
| पुरान | पुराणों का | of the Puranas |
| श्रुति | वेदों का | of the Vedas |
| सारा | सार | essence |
2 मंगल भवन अमंगल हारी। उमा सहित जेहि जपत पुरारी।।
English explanation
That name is the abode of auspiciousness and the destroyer of misfortune; Shiva chants it together with Uma.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगल | मंगल, कल्याण | auspiciousness, welfare |
| भवन | धाम, आश्रय | abode, home |
| अमंगल | अमंगल, अनिष्ट | misfortune, adversity |
| हारी | हरने वाला | remover, destroyer |
| उमा | पार्वती, शिव की पत्नी | Uma, Shiva’s consort |
| सहित | के साथ | together with |
| जेहि | जिस नाम को | which name |
| जपत | जपते हैं | chants |
| पुरारी | त्रिपुर के शत्रु शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 30
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 30, 31
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।