बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। आनँद उमगि उमगि उर भरहीं।।
मूल पाठ
एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। आनँद उमगि उमगि उर भरहीं।।
जे नृप सीय स्वयंबर आए। देखि बंधु सब तिन्ह सुख पाए।।
स्रोत अभिलेख 1.312 · पुस्तक पृ. 293, 294
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार सब मनोरथ कर रही हैं और हृदयको उमँग-उमँगकर (उत्साहपूर्वक) आनन्दसे भर रही हैं। सीताजीके स्वयंवरमें जो राजा आये थे, उन्होंने भी चारों भाइयोंको देखकर सुख पाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 293 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। आनँद उमगि उमगि उर भरहीं।।
English explanation
In this way, all entertain their cherished wishes; joy wells up repeatedly and fills their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार से | in this manner |
| सकल | सब लोग | everyone |
| मनोरथ | मन की इच्छाएँ | cherished wishes |
| करहीं | करते हैं | entertain |
| आनँद | आनंद | joy |
| उमगि | उमड़कर | welling up |
| उमगि | बार-बार उमड़कर | welling up again |
| उर | हृदय | hearts |
| भरहीं | भर देते हैं | fill |
2 जे नृप सीय स्वयंबर आए। देखि बंधु सब तिन्ह सुख पाए।।
English explanation
All the kings who had come to Sita’s svayamvara found joy in seeing the brothers Rama and Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | who |
| नृप | राजा | kings |
| सीय | सीता के | Sita’s |
| स्वयंबर | वर-चयन समारोह में | at the bride’s choice-of-husband ceremony |
| आए | आए थे | had come |
| देखि | देखकर | having seen |
| बंधु | भाइयों राम और लक्ष्मण को | the brothers Rama and Lakshmana |
| सब | सबने | all |
| तिन्ह | उन राजाओं ने | those kings |
| सुख | सुख | joy |
| पाए | पाया | found |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.312
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 293
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 293, 294
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।