बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई। जदपि असत्य देत दुख अहई।।
मूल पाठ
एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई। जदपि असत्य देत दुख अहई।।
जौं सपनें सिर काटै कोई। बिनु जागें न दूरि दुख होई।।
स्रोत अभिलेख 1.118 · पुस्तक पृ. 130, 130
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसी तरह यह संसार भगवान्के आश्रित रहता है। यद्यपि यह असत्य है, तो भी दु:ख तो देता ही है; जिस तरह स्वप्रमें कोई सिर काट ले तो बिना जागे वह दु:ख दूर नहीं होता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 130 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई। जदपि असत्य देत दुख अहई।।
English explanation
AI draft: Thus the world depends on Hari. Although unreal, it nevertheless causes suffering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| जग | जगत | the world |
| हरि | भगवान हरि पर | on Lord Hari |
| आश्रित | आश्रय लिए हुए | dependent |
| रहई | रहता है | remains |
| जदपि | यद्यपि | although |
| असत्य | असत्य; वास्तविक नहीं | unreal |
| देत | देता है | causes |
| दुख | दुःख | suffering |
| अहई | है | is |
2 जौं सपनें सिर काटै कोई। बिनु जागें न दूरि दुख होई।।
English explanation
If someone cuts off one's head in a dream, that suffering does not cease without awakening.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| सपनें | सपने में | in a dream |
| सिर | सिर | one's head |
| काटै | काट दे | cuts off |
| कोई | कोई व्यक्ति | someone |
| बिनु | बिना | without |
| जागें | जागने के | awakening |
| न | नहीं | not |
| दूरि | दूर | removed |
| दुख | दुःख | suffering |
| होई | होता है | becomes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 130
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 130, 130
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।