बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना।।
मूल पाठ
उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना।।
अति सुकुमार न तनु तप जोगू। पति पद सुमिरि तजेउ सबु भोगू।।
स्रोत अभिलेख 1.74 · पुस्तक पृ. 90, 91
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्राणपति (शिवजी) के चरणोंको हृदयमें धारण करके पार्वतीजी वनमें जाकर तप करने लगीं। पार्वतीजीका अत्यन्त सुकुमार शरीर तपके योग्य नहीं था, तो भी पतिके चरणोंका स्मरण करके उन्होंने सब भोगोंको तज दिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 90 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना।।
English explanation
Holding the feet of her beloved Shiva in her heart, Uma went to the forest and began practicing austerities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | हृदय में | in the heart |
| धरि | धारण करके | having held |
| उमा | उमा, पार्वती | Uma, Parvati |
| प्रानपति | प्राणप्रिय पति शिव के | of her dearly beloved lord, Shiva |
| चरना | चरणों को | the feet |
| जाइ | जाकर | having gone |
| बिपिन | वन में | into the forest |
| लागीं | लगीं | began |
| तपु | तपस्या | austerities |
| करना | करने | to practice |
2 अति सुकुमार न तनु तप जोगू। पति पद सुमिरि तजेउ सबु भोगू।।
English explanation
Her body was exceedingly delicate and unfit for austerities; yet, remembering her lord Shiva’s feet, she renounced all pleasures.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सुकुमार | कोमल | delicate |
| न | नहीं | not |
| तनु | शरीर | body |
| तप | तपस्या के | for austerities |
| जोगू | योग्य | fit |
| पति | पति शिव के | of her lord Shiva |
| पद | चरणों को | the feet |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| तजेउ | त्याग दिया | renounced |
| सबु | सभी | all |
| भोगू | सुख-भोग | pleasures and comforts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 90
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 90, 91
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।