बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उभय घरी अस कौतुक भयऊ। जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ।।
मूल पाठ
उभय घरी अस कौतुक भयऊ। जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ।।
सिवहि बिलोकि ससंकेउ मारू। भयउ जथाथिति सबु संसारू।।
स्रोत अभिलेख 1.86 · पुस्तक पृ. 100, 101
भावार्थ
मूल पाठ के बाददो घड़ीतक ऐसा तमाशा हुआ, जबतक कामदेव शिवजीके पास पहुँच गया। शिवजीको देखकर कामदेव डर गया, तब सारा संसार फिर जैसा-का-तैसा स्थिर हो गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 100 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 उभय घरी अस कौतुक भयऊ। जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ।।
English explanation
This is an AI-generated interpretive draft. This strange spectacle lasted for two gharis, until the god of desire reached Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उभय | दोनों; यहाँ दो | both; here, two |
| घरी | घड़ी, समय की इकाई | gharis, units of time |
| अस | ऐसा | such |
| कौतुक | अद्भुत खेल या दृश्य | strange spectacle |
| भयऊ | हुआ | occurred |
| जौ | जब तक के अर्थ में ‘जब’ | until, together with the next word |
| लगि | तक | up to |
| कामु | कामदेव | the god of desire |
| संभु | शिव | Shiva |
| पहिं | के पास | to the presence of |
| गयऊ | गए; पहुँचे | went; reached |
2 सिवहि बिलोकि ससंकेउ मारू। भयउ जथाथिति सबु संसारू।।
English explanation
Seeing Shiva, the god of desire grew apprehensive; the whole world returned to its former state.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिवहि | शिव को | Shiva, as the object of seeing |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| ससंकेउ | सहमे; आशंकित हुए | grew apprehensive |
| मारू | कामदेव | the god of desire |
| भयउ | हो गया | became |
| जथाथिति | पहले जैसी स्थिति में | in its former state |
| सबु | सारा | the whole |
| संसारू | संसार | world |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 100
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 100, 101
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।