बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उपरोहित जेवनार बनाई। छरस चारि बिधि जसि श्रुति गाई।।
मूल पाठ
उपरोहित जेवनार बनाई। छरस चारि बिधि जसि श्रुति गाई।।
मायामय तेहिं कीन्ह रसोई। बिंजन बहु गनि सकइ न कोई।।
स्रोत अभिलेख 1.173 · पुस्तक पृ. 175, 175
भावार्थ
मूल पाठ के बादपुरोहितने छ: रस और चार प्रकारके भोजन, जैसा कि वेदोंमें वर्णन है, बनाये। उसने मायामयी रसोई तैयार की और इतने व्यञ्जन बनाये जिन्हें कोई गिन नहीं सकता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 175 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उपरोहित जेवनार बनाई। छरस चारि बिधि जसि श्रुति गाई।।
English explanation
The priest prepared a feast comprising six tastes and four kinds of food, as described in the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपरोहित | पुरोहित ने | the priest |
| जेवनार | भोज | a feast |
| बनाई | तैयार किया | prepared |
| छरस | छह रसों वाला | comprising six tastes |
| चारि | चार | four |
| बिधि | प्रकार | kinds |
| जसि | जैसी | as |
| श्रुति | वेदों ने | the Vedas |
| गाई | वर्णित की है | have described |
2 मायामय तेहिं कीन्ह रसोई। बिंजन बहु गनि सकइ न कोई।।
English explanation
He prepared the meal through illusion; the dishes were so numerous that no one could count them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मायामय | माया से निर्मित | produced through illusion |
| तेहिं | उसने | he |
| कीन्ह | बनाई | made |
| रसोई | रसोई; तैयार भोजन | the prepared meal |
| बिंजन | व्यंजन | dishes |
| बहु | बहुत अधिक | very numerous |
| गनि | गिन | count |
| सकइ | सकता था | could |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई भी | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.173
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 175
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 175, 175
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