बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उदउ अरुन अवलोकहु ताता। पंकज कोक लोक सुखदाता।।
मूल पाठ
उदउ अरुन अवलोकहु ताता। पंकज कोक लोक सुखदाता।।
बोले लखनु जोरि जुग पानी। प्रभु प्रभाउ सूचक मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.238 · पुस्तक पृ. 232, 233
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! देखो, कमल, चक्रवाक और समस्त संसारको सुख देनेवाला अरुणोदय हुआ है। लक्ष्मणजी दोनों हाथ जोड़कर प्रभुके प्रभावको सूचित करनेवाली कोमल वाणी बोले—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 233 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 उदउ अरुन अवलोकहु ताता। पंकज कोक लोक सुखदाता।।
English explanation
Dear brother, behold the rising dawn, which brings joy to lotuses, chakravaka birds, and the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उदउ | उदय | rising |
| अरुन | भोर की लालिमा का | of the ruddy dawn |
| अवलोकहु | देखो | behold |
| ताता | हे प्रिय भाई | dear brother |
| पंकज | कमलों को | to lotuses |
| कोक | चकवों को | to chakravaka birds |
| लोक | संसार को | to the world |
| सुखदाता | सुख देने वाला | bringing joy |
2 बोले लखनु जोरि जुग पानी। प्रभु प्रभाउ सूचक मृदु बानी।।
English explanation
Joining both hands, Lakshmana spoke gentle words that conveyed the might of his lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | spoke |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| जोरि | जोड़कर | joining |
| जुग | दोनों | both |
| पानी | हाथ | hands |
| प्रभु | स्वामी राम के | of his lord Rama |
| प्रभाउ | प्रताप को | might |
| सूचक | प्रकट करने वाली | indicating |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.238
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 233
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 232, 233
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।