बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी। सदा काम के चेरे जानी।।
मूल पाठ
इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी। सदा काम के चेरे जानी।।
सिद्ध बिरक्त महामुनि जोगी। तेपि कामबस भए बियोगी।।
स्रोत अभिलेख 1.85 · पुस्तक पृ. 99, 100
भावार्थ
मूल पाठ के बादये तो सदा ही कामके गुलाम हैं, यह समझकर मैंने इनकी दशाका वर्णन नहीं किया। सिद्ध, विरक्त, महामुनि और महान् योगी भी कामके वश होकर योगरहित या स्त्रीके विरही हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 100 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी। सदा काम के चेरे जानी।।
English explanation
I have not described their condition in detail, knowing them to be perpetual servants of desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इन्ह | इनकी; ऊपर गिनाए प्राणियों की | of these previously listed beings |
| कै | की | of |
| दसा | दशा | condition |
| न | नहीं | not |
| कहेउँ | मैंने कही | I have told |
| बखानी | विस्तार से वर्णन करके | in detailed description |
| सदा | सदा | always |
| काम | काम; कामदेव | desire; the god of love |
| के | के | of |
| चेरे | सेवक | servants |
| जानी | जानकर | knowing them to be |
2 सिद्ध बिरक्त महामुनि जोगी। तेपि कामबस भए बियोगी।।
English explanation
Perfected adepts, renunciants, great sages, and yogis—even they fell under desire's sway and became tormented by separation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिद्ध | सिद्ध साधक | perfected spiritual adepts |
| बिरक्त | सांसारिक आसक्ति से रहित साधक | detached renunciants |
| महामुनि | महान मुनि | great sages |
| जोगी | योगी | practitioners of yoga |
| तेपि | वे भी | even they |
| कामबस | काम के वश में | under desire's sway |
| भए | हो गए | became |
| बियोगी | विरह से व्याकुल | tormented by separation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 100
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 99, 100
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