बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि सब महिदेव सिधाए। समाचार पुरलोगन्ह पाए।।
मूल पाठ
अस कहि सब महिदेव सिधाए। समाचार पुरलोगन्ह पाए।।
सोचहिं दूषन दैवहि देहीं। बिचरत हंस काग किय जेहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.175 · पुस्तक पृ. 176, 177
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा कहकर सब ब्राह्मण चले गये। नगरवासियोंने [जब] यह समाचार पाया, तो वे चिन्ता करने और विधाताको दोष देने लगे, जिसने हंस बनाते-बनाते कौआ कर दिया (ऐसे पुण्यात्मा राजाको देवता बनाना चाहिये था, सो राक्षस बना दिया)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 176 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस कहि सब महिदेव सिधाए। समाचार पुरलोगन्ह पाए।।
English explanation
AI draft: Having said this, all the Brahmins departed. The townspeople received the news.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| सब | सभी | all |
| महिदेव | ब्राह्मण | Brahmins |
| सिधाए | चले गए | departed |
| समाचार | समाचार | news |
| पुरलोगन्ह | नगरवासियों ने | the townspeople |
| पाए | प्राप्त किया | received |
2 सोचहिं दूषन दैवहि देहीं। बिचरत हंस काग किय जेहीं।।
English explanation
They grieve and blame fate, reflecting that it has turned a swan into a crow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोचहिं | शोक करते हैं | grieve |
| दूषन | दोष | blame |
| दैवहि | दैव को | to fate |
| देहीं | देते हैं | give |
| बिचरत | विचार करते हुए | reflecting |
| हंस | हंस को | a swan |
| काग | कौआ | a crow |
| किय | बना दिया | made into |
| जेहीं | जिसने | which has |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.175
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 176
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 176, 177
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।