बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि फिरि चितए तेहि ओरा। सिय मुख ससि भए नयन चकोरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा कहकर श्रीरामजीने फिरकर उस ओर देखा। श्रीसीताजीके मुखरूपी चन्द्रमा [को निहारने] के लिये उनके नेत्र चकोर बन गये। सुन्दर नेत्र स्थिर हो गये (टकटकी लग गयी)। मानो निमि (जनकजीके पूर्वज) ने [जिनका सबकी पलकोंमें निवास माना गया है, लड़की-दामादके मिलन- प्रसङ्गको देखना उचित नहीं, इस भावसे] सकुचाकर पलकें छोड़ दीं, (पलकोंमें रहना छोड़ दिया, जिससे पलकोंका गिरना रुक गया)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 225 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस कहि फिरि चितए तेहि ओरा। सिय मुख ससि भए नयन चकोरा।।
भए बिलोचन चारु अचंचल। मनहुँ सकुचि निमि तजे दिगंचल।।
स्रोत अभिलेख 1.23 · पुस्तक पृ. 225, 226
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस कहि फिरि चितए तेहि ओरा। सिय मुख ससि भए नयन चकोरा।।
English explanation
Saying this, Rama turned and looked that way; his eyes became like chakora birds gazing at the moon of Sita’s face.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| फिरि | मुड़कर | turning |
| चितए | देखा | looked |
| तेहि | उस | that |
| ओरा | ओर | direction |
| सिय | सीता | Sita |
| मुख | मुख | face |
| ससि | चंद्रमा | moon |
| भए | हो गए | became |
| नयन | राम के नेत्र | Rama’s eyes |
| चकोरा | चकोर पक्षी | chakora birds |
2 भए बिलोचन चारु अचंचल। मनहुँ सकुचि निमि तजे दिगंचल।।
English explanation
Rama’s beautiful eyes became motionless, as though Nimi had bashfully left the corners of his eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| बिलोचन | नेत्र | eyes |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| अचंचल | स्थिर, बिना पलक झपकाए | motionless, unblinking |
| मनहुँ | मानो | as though |
| सकुचि | संकोच करके | feeling bashful |
| निमि | राजा निमि | King Nimi |
| तजे | छोड़ दिए | abandoned |
| दिगंचल | नेत्रों के कोने | corners of the eyes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 225
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 225, 226
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।