बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति खल जे बिषई बग कागा। एहिं सर निकट न जाहिं अभागा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो अति दुष्ट और विषयी हैं वे अभागे बगुले और कौवे हैं, जो इस सरोवरके समीप नहीं जाते। क्योंकि यहाँ (इस मानस-सरोवरमें) घोंघे, मेढक और सेवारके समान विषय-रसकी नाना कथाएँ नहीं हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 61 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति खल जे बिषई बग कागा। एहिं सर निकट न जाहिं अभागा।।
संबुक भेक सेवार समाना। इहाँ न बिषय कथा रस नाना।।
स्रोत अभिलेख 1.38 · पुस्तक पृ. 61, 61
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अति खल जे बिषई बग कागा। एहिं सर निकट न जाहिं अभागा।।
English explanation
The utterly wicked and sense-indulgent, likened to herons and crows, are unfortunate people who do not go near this lake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | extremely |
| खल | दुष्ट | wicked |
| जे | जो लोग | those who |
| बिषई | इंद्रिय-विषयों में आसक्त | attached to sensual pleasures |
| बग | बगुले | herons |
| कागा | कौए | crows |
| एहिं | इस | this |
| सर | सरोवर के | lake |
| निकट | पास | near |
| न | नहीं | not |
| जाहिं | जाते हैं | go |
| अभागा | अभागे लोग | unfortunate people |
2 संबुक भेक सेवार समाना। इहाँ न बिषय कथा रस नाना।।
English explanation
Here there are none of the varied pleasures of worldly tales, likened to snails, frogs, and aquatic weeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संबुक | घोंघे | snails |
| भेक | मेंढक | frogs |
| सेवार | जल में उगने वाली वनस्पति | aquatic weeds |
| समाना | के समान | like |
| इहाँ | यहाँ | here |
| न | नहीं हैं | there are no |
| बिषय | सांसारिक भोग-विषयों की | about worldly pleasures |
| कथा | कथाओं के | of tales |
| रस | रस, आस्वाद | pleasures and tastes |
| नाना | विविध | various |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 61
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 61, 61
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।