बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति आदर दोउ तनय बोलाए। हृदयँ लाइ बहु भाँति सिखाए।।
मूल पाठ
अति आदर दोउ तनय बोलाए। हृदयँ लाइ बहु भाँति सिखाए।।
मेरे प्रान नाथ सुत दोऊ। तुम्ह मुनि पिता आन नहिं कोऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.208 · पुस्तक पृ. 206, 207
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने बड़े ही आदरसे दोनों पुत्रोंको बुलाया और हृदयसे लगाकर बहुत प्रकारसे उन्हें शिक्षा दी। [फिर कहा—] हे नाथ! ये दोनों पुत्र मेरे प्राण हैं। हे मुनि! [अब] आप ही इनके पिता हैं, दूसरा कोई नहीं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 206 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अति आदर दोउ तनय बोलाए। हृदयँ लाइ बहु भाँति सिखाए।।
English explanation
The king called both sons with great regard, embraced them, and instructed them in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत | great |
| आदर | आदर से | with regard |
| दोउ | दोनों | both |
| तनय | पुत्रों को; राम और लक्ष्मण को | sons, Rama and Lakshmana |
| बोलाए | बुलाया | called |
| हृदयँ | हृदय से | to his heart |
| लाइ | लगाकर | having clasped |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| सिखाए | शिक्षा दी | instructed |
2 मेरे प्रान नाथ सुत दोऊ। तुम्ह मुनि पिता आन नहिं कोऊ।।
English explanation
O master, these two sons are my very life. O sage, you are their father now, and no one else.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मेरे | मेरे | my |
| प्रान | प्राण हैं | are very life |
| नाथ | हे स्वामी | O master |
| सुत | पुत्र | sons |
| दोऊ | दोनों | both |
| तुम्ह | आप | you |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| पिता | पिता हैं | are their father |
| आन | अन्य | other |
| नहिं | नहीं | not |
| कोऊ | कोई | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.208
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 206
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 206, 207
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।