बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दये अजन्मा, अनादि और अविनाशिनी शक्ति हैं। सदा शिवजीके अद्र्धाङ्गमें रहती हैं। ये जगत्की उत्पत्ति, पालन और संहार करनेवाली हैं; और अपनी इच्छासे ही लीला-शरीर धारण करती हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 112 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि।।
जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि।।
स्रोत अभिलेख 1.98 · पुस्तक पृ. 112, 112
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि।।
English explanation
AI draft: She is the unborn, beginningless, imperishable divine power, ever dwelling in one half of Shiva’s body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अजा | जन्मरहित | unborn |
| अनादि | जिसका कोई आरंभ नहीं | without beginning |
| सक्ति | दिव्य शक्ति | divine power |
| अबिनासिनि | नष्ट न होने वाली | imperishable |
| सदा | सदा | always |
| संभु | शंभु, शिव के | of Shambhu, Shiva |
| अरधंग | आधे अंग में | in one half of the body |
| निवासिनि | निवास करने वाली | she who dwells |
2 जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि।।
English explanation
AI draft: She brings about the world’s creation, sustenance, and dissolution, and assumes a body by her own will for divine play.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग | जगत की | of the world |
| संभव | उत्पत्ति | creation |
| पालन | पालन | sustenance |
| लय | विलय; संहार | dissolution |
| कारिनि | करने वाली | she who brings about |
| निज | अपनी | her own |
| इच्छा | इच्छा से | by will |
| लीला | लीला के लिए | for divine play |
| बपु | शरीर | a body |
| धारिनि | धारण करने वाली | she who assumes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 112
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 112, 112
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।