अयोध्याकाण्ड · दोहा 268 · दोहा/सोरठा
सानुज पठइअ मोहि बन कीजिअ सबहि सनाथ।
सानुज पठइअ मोहि बन कीजिअ सबहि सनाथ।
नतरु फेरिअहिं बंधु दोउ नाथ चलौं मैं साथ।।268।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.268 · पुस्तक पृ. 567, 567
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सानुज पठइअ मोहि बन कीजिअ सबहि सनाथ।
मुझे छोटे भाई सहित वन भेज दीजिए और सबको अपना संरक्षण देकर सनाथ कीजिए।
English explanation
Send me to the forest with my younger brother, and give everyone the protection of your presence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुज | छोटे भाई सहित | with my younger brother |
| पठइअ | भेज दीजिए | please send |
| मोहि | मुझे | me |
| बन | वन में | to the forest |
| कीजिअ | कीजिए | please make |
| सबहि | सबको | everyone |
| सनाथ | नाथ के संरक्षण से युक्त | protected by their lord |
2 नतरु फेरिअहिं बंधु दोउ नाथ चलौं मैं साथ।।268।।
अन्यथा दोनों भाइयों को वापस भेज दीजिए; हे नाथ, मैं आपके साथ चलूँ।
English explanation
Otherwise, send both brothers back; lord, let me accompany you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नतरु | नहीं तो | otherwise |
| फेरिअहिं | वापस भेज दीजिए | please send back |
| बंधु | भाइयों को | the brothers |
| दोउ | दोनों | both |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| चलौं | चलूँ | let me go |
| मैं | मैं | I |
| साथ | आपके साथ | with you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 268
- स्रोत अभिलेख
- 2.268
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 567, 567
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।