अयोध्याकाण्ड · दोहा 316 · दोहा/सोरठा
मागेउ बिदा प्रनामु करि राम लिए उर लाइ।
मागेउ बिदा प्रनामु करि राम लिए उर लाइ।
लोग उचाटे अमरपति कुटिल कुअवसरु पाइ।।316।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.316 · पुस्तक पृ. 608, 609
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मागेउ बिदा प्रनामु करि राम लिए उर लाइ।
भरत ने प्रणाम करके विदा माँगी; राम ने उन्हें हृदय से लगा लिया।
English explanation
Bharata bowed and asked leave to depart; Rama drew him to his chest in an embrace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागेउ | माँगी | asked for |
| बिदा | विदा; जाने की अनुमति | leave to depart |
| प्रनामु | प्रणाम | a respectful bow |
| करि | करके | having made |
| राम | राम ने | Rama |
| लिए | ले लिया | took; drew |
| उर | छाती से | to his chest |
| लाइ | लगाकर | holding close |
2 लोग उचाटे अमरपति कुटिल कुअवसरु पाइ।।316।।
कुटिल देवराज इंद्र ने इस बुरे अवसर का लाभ पाकर लोगों के मन उचाट कर दिए।
English explanation
The scheming king of the gods, Indra, seized this ill-timed opportunity and made the people restless and eager to leave.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोग | लोगों के मन | the people’s minds |
| उचाटे | उचाट कर दिए; अस्थिर किए | unsettled; made restless |
| अमरपति | देवताओं के राजा इंद्र ने | Indra, king of the gods |
| कुटिल | कुटिल; कपटी | scheming; deceitful |
| कुअवसरु | बुरा; अनुपयुक्त अवसर | an ill-timed opportunity |
| पाइ | पाकर | having found; seizing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 316
- स्रोत अभिलेख
- 2.316
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद,पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 608, 609
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