अयोध्याकाण्ड · दोहा 244 · दोहा/सोरठा
भेटीं रघुबर मातु सब करि प्रबोधु परितोषु।।
भेटीं रघुबर मातु सब करि प्रबोधु परितोषु।।
अंब ईस आधीन जगु काहु न देइअ दोषु।।244।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.244 · पुस्तक पृ. 546, 547
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भेटीं रघुबर मातु सब करि प्रबोधु परितोषु।।
रघुकुलश्रेष्ठ राम ने सभी माताओं से मिलकर उन्हें समझाया और संतोष दिया।
English explanation
Rama, foremost of Raghu's lineage, met all his mothers, reassuring and comforting them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भेटीं | मिले | met |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu's lineage |
| मातु | माताओं से | his mothers |
| सब | सभी | all |
| करि | करके; देकर | giving |
| प्रबोधु | समझाइश | reassurance |
| परितोषु | संतोष; सांत्वना | comfort and consolation |
2 अंब ईस आधीन जगु काहु न देइअ दोषु।।244।।
हे माता, संसार ईश्वर के अधीन है; किसी को दोष नहीं देना चाहिए।
English explanation
Mother, the world is under God's authority; no one should be blamed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंब | हे माता | O mother |
| ईस | ईश्वर के | God's |
| आधीन | अधीन | under the authority of |
| जगु | संसार | the world |
| काहु | किसी को | to anyone |
| न | नहीं | not |
| देइअ | देना चाहिए | should be assigned |
| दोषु | दोष | blame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 244
- स्रोत अभिलेख
- 2.244
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 546, 547
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