अयोध्याकाण्ड · दोहा 64 · दोहा/सोरठा
प्राननाथ करुनायतन सुंदर सुखद सुजान।
प्राननाथ करुनायतन सुंदर सुखद सुजान।
तुम्ह बिनु रघुकुल कुमुद बिधु सुरपुर नरक समान।।64।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.64 · पुस्तक पृ. 396, 397
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 प्राननाथ करुनायतन सुंदर सुखद सुजान।
हे प्राणप्रिय स्वामी, करुणा के धाम, सुंदर, सुख देने वाले और विवेकशील!
English explanation
O lord dear as life, abode of compassion, beautiful, joy-giving, and wise!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्राननाथ | हे प्राणप्रिय स्वामी राम | O Rama, lord dear as life |
| करुनायतन | हे करुणा के धाम | O abode of compassion |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सुखद | सुख देने वाले | giver of happiness |
| सुजान | विवेकशील, समझदार | wise, discerning |
2 तुम्ह बिनु रघुकुल कुमुद बिधु सुरपुर नरक समान।।64।।
हे रघुकुलरूपी कुमुद को खिलाने वाले चंद्रमा राम, तुम्हारे बिना स्वर्ग भी नरक के समान है।
English explanation
O Rama, moon that makes the water lily of Raghu's lineage bloom, without you even heaven is like hell.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| बिनु | बिना | without |
| रघुकुल | रघु का वंश | Raghu's lineage |
| कुमुद | कुमुद, रात में खिलने वाला कमल | night-blooming water lily |
| बिधु | चंद्रमा, यहाँ राम | moon, here Rama |
| सुरपुर | देवताओं का नगर, स्वर्ग | city of the gods, heaven |
| नरक | नरक | hell |
| समान | के समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 64
- स्रोत अभिलेख
- 2.64
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 396, 397
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