अयोध्याकाण्ड · दोहा 188 · दोहा/सोरठा
पय अहार फल असन एक निसि भोजन एक लोग।
पय अहार फल असन एक निसि भोजन एक लोग।
करत राम हित नेम ब्रत परिहरि भूषन भोग।।188।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.188 · पुस्तक पृ. 499, 499
भावार्थ और शब्दार्थ
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1पय अहार फल असन एक निसि भोजन एक लोग।
कुछ लोग दूध का आहार लेते थे, कुछ फल खाते थे और कुछ केवल रात में भोजन करते थे।
English explanation
Some people subsisted on milk, some ate fruit, and some took their meal only at night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पय | दूध | milk |
| अहार | आहार | as sustenance |
| फल | फल | fruit |
| असन | खाना; आहार | eating; food |
| एक | कुछ लोग | some |
| निसि | रात में | at night |
| भोजन | भोजन | taking a meal |
| एक | कुछ | some |
| लोग | लोग | people |
2 करत राम हित नेम ब्रत परिहरि भूषन भोग।।188।।
वे आभूषण और भोग-विलास छोड़कर राम के लिए नियम और व्रत कर रहे थे।
English explanation
Giving up ornaments and pleasures, they observed disciplines and vows for Rama’s sake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | कर रहे थे | were observing |
| राम | राम के | Rama’s |
| हित | लिए; हित में | for the sake of |
| नेम | संयम के नियम | disciplines |
| ब्रत | व्रत | vows; observances |
| परिहरि | त्यागकर | having given up |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| भोग | भोग-विलास | pleasures and luxuries |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 188
- स्रोत अभिलेख
- 2.188
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 499, 499
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