अयोध्याकाण्ड · दोहा 156 · दोहा/सोरठा
तब बसिष्ठ मुनि समय सम कहि अनेक इतिहास।
तब बसिष्ठ मुनि समय सम कहि अनेक इतिहास।
सोक नेवारेउ सबहि कर निज बिग्यान प्रकास।।156।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.156 · पुस्तक पृ. 473, 473
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तब बसिष्ठ मुनि समय सम कहि अनेक इतिहास।
तब वसिष्ठ मुनि ने अवसर के अनुकूल अनेक पुराने वृत्तांत सुनाए।
English explanation
Then the sage Vasistha recounted many accounts of the past suited to the occasion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| बसिष्ठ | वसिष्ठ, राजगुरु | Vasistha, the royal preceptor |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| समय | अवसर के | to the occasion |
| सम | अनुकूल | suited |
| कहि | कहकर | having recounted |
| अनेक | अनेक | many |
| इतिहास | पुराने वृत्तांत | accounts of the past |
2 सोक नेवारेउ सबहि कर निज बिग्यान प्रकास।।156।।
अपने विवेकपूर्ण ज्ञान का प्रकाश फैलाकर उन्होंने सबका शोक दूर किया।
English explanation
By shedding the light of his discerning wisdom, he dispelled everyone’s grief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोक | शोक | grief |
| नेवारेउ | दूर किया | dispelled |
| सबहि | सबका | everyone’s |
| कर | का | of |
| निज | अपने | his own |
| बिग्यान | विवेकपूर्ण ज्ञान का | of discerning wisdom |
| प्रकास | प्रकाश करके | by shedding light |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 156
- स्रोत अभिलेख
- 2.156
- सहायक विषय
- मुनि वसिष्ठका भरतजीको बुलानेके लिये दूत भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 473, 473
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।