अयोध्याकाण्ड · छंद · छंद
बिधि बाम की करनी कठिन जेहिं मातु कीन्ही बावरी।
मूल पाठ
बिधि बाम की करनी कठिन जेहिं मातु कीन्ही बावरी।
तेहि राति पुनि पुनि करहिं प्रभु सादर सरहना रावरी॥
तुलसी न तुम्ह सो राम प्रीतमु कहतु हौं सौंहें किएँ।
परिनाम मंगल जानि अपने आनिए धीरजु हिएँ॥
स्रोत अभिलेख 2.201 · पुस्तक पृ. 510, 510
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रतिकूल विधाताकी करनी बड़ी कठोर है, जिसने माता कैकेयीको बावली बना दिया (उसकी मति फेर दी)। उस रातको प्रभु श्रीरामचन्द्रजी बार-बार आदरपूर्वक आपकी बड़ी सराहना करते थे। तुलसीदासजी कहते हैं—[निषादराज कहता है कि—]श्रीरामचन्द्रजीको आपके समान अतिशय प्रिय और कोई नहीं है, मैं सौगंध खाकर कहता हूँ। परिणाममें मङ्गल होगा, यह जानकर आप अपने हृदयमें धैर्य धारण कीजिये।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 510 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1बिधि बाम की करनी कठिन जेहिं मातु कीन्ही बावरी।
English explanation
Harsh are the workings of adverse fate, which drove Mother out of her senses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधि | विधाता; भाग्य का नियंता | the ordainer of fate |
| बाम | प्रतिकूल | adverse |
| की | की | of |
| करनी | करनी; किया हुआ कार्य | working; deed |
| कठिन | कठोर; दुःखद | harsh; distressing |
| जेहिं | जिसने | which; who |
| मातु | माता कैकेयी को | Mother Kaikeyi |
| कीन्ही | बना दिया | made |
| बावरी | बावली; विवेकहीन | distraught; deprived of judgment |
2तेहि राति पुनि पुनि करहिं प्रभु सादर सरहना रावरी॥
English explanation
That night, Lord Rama repeatedly praised you with respect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| राति | रात | night |
| पुनि | फिर; बार | again |
| पुनि | फिर; बार | again |
| करहिं | करते हैं; करते रहे | does; kept doing |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सरहना | प्रशंसा | praise |
| रावरी | आपकी | your |
3तुलसी न तुम्ह सो राम प्रीतमु कहतु हौं सौंहें किएँ।
English explanation
Tulsidas says: I declare on oath that no one is as dear to Rama as you are.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| न | नहीं | not; none |
| तुम्ह | आप; भरत | you, Bharata |
| सो | के समान | like; equal to |
| राम | राम को; राम के लिए | to Rama |
| प्रीतमु | प्रिय व्यक्ति | beloved; dear one |
| कहतु | कहता | say; declare |
| हौं | मैं हूँ | I am |
| सौंहें | शपथ | oath |
| किएँ | लेकर; करके | having taken; making |
4परिनाम मंगल जानि अपने आनिए धीरजु हिएँ॥
English explanation
Knowing that the outcome will be auspicious, bring patience into your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परिनाम | अंतिम परिणाम | outcome |
| मंगल | शुभ; मंगलमय | auspicious |
| जानि | जानकर | knowing; recognizing |
| अपने | अपने | your own |
| आनिए | लाइए | bring |
| धीरजु | धैर्य | patience; fortitude |
| हिएँ | हृदय में | in the heart |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 2.201
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 510
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 510, 510
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।