अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
होहु सँजोइल रोकहु घाटा। ठाटहु सकल मरै के ठाटा।।
मूल पाठ
होहु सँजोइल रोकहु घाटा। ठाटहु सकल मरै के ठाटा।।
सनमुख लोह भरत सन लेऊँ। जिअत न सुरसरि उतरन देऊँ।।
स्रोत अभिलेख 2.19 · पुस्तक पृ. 500, 501
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुसज्जित होकर घाटोंको रोक लो और सब लोग मरनेके साज सजा लो (अर्थात् भरतसे युद्धमें लड़कर मरनेके लिये तैयार हो जाओ)। मैं भरतसे सामने (मैदानमें) लोहा लूँगा (मुठभेड़ करूँगा) और जीते-जी उन्हें गङ्गापार न उतरने दूँगा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 500 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 होहु सँजोइल रोकहु घाटा। ठाटहु सकल मरै के ठाटा।।
English explanation
AI-draft meaning: Put on your armor, block the river landings, and make every preparation to face death.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होहु | हो जाओ | become |
| सँजोइल | कवच से सुसज्जित | equipped with armor |
| रोकहु | रोक लो | block |
| घाटा | नदी के घाटों को | the river landings |
| ठाटहु | तैयार करो | make ready |
| सकल | सब | all |
| मरै | मरने | dying |
| के | के लिए | for |
| ठाटा | तैयारियाँ | preparations |
2 सनमुख लोह भरत सन लेऊँ। जिअत न सुरसरि उतरन देऊँ।।
English explanation
I will confront Bharata in battle; while I live, I will not let him cross the Ganges.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सनमुख | आमने-सामने | face to face |
| लोह | युद्ध; लोहा | combat |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| सन | से | with |
| लेऊँ | मैं लूँगा | I will engage |
| जिअत | मेरे जीते जी | while I live |
| न | नहीं | not |
| सुरसरि | गंगा नदी | the Ganges River |
| उतरन | पार करने | to cross |
| देऊँ | मैं दूँगा | I will allow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 500
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 500, 501
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।