अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हम सब सानुज भरतहि देखें। भइन्ह धन्य जुबती जन लेखें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दछोटे भाई शत्रुघ्रसहित भरतजीको देखकर हम सब भी आज धन्य (बड़भागिनी) स्त्रियोंकी गिनतीमें आ गयीं। इस प्रकार भरतजीके गुण सुनकर और उनकी दशा देखकर स्त्रियाँ पछताती हैं और कहती हैं—यह पुत्र कैकेयी-जैसी माताके योग्य नहीं है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 529 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हम सब सानुज भरतहि देखें। भइन्ह धन्य जुबती जन लेखें।।
सुनि गुन देखि दसा पछिताहीं। कैकइ जननि जोगु सुतु नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.223 · पुस्तक पृ. 529, 529
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हम सब सानुज भरतहि देखें। भइन्ह धन्य जुबती जन लेखें।।
English explanation
Having seen Bharata with his younger brother, we have all become blessed among women.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हम | हम | we |
| सब | सब | all |
| सानुज | छोटे भाई शत्रुघ्न सहित | with his younger brother Shatrughna |
| भरतहि | भरत को | Bharata |
| देखें | देखने से | through seeing |
| भइन्ह | हो गईं | have become |
| धन्य | धन्य | blessed |
| जुबती | स्त्रियों | women |
| जन | लोगों; समुदाय | people; community |
| लेखें | की गिनती में | in the reckoning of |
2 सुनि गुन देखि दसा पछिताहीं। कैकइ जननि जोगु सुतु नाहीं।।
English explanation
Hearing Bharata’s virtues and seeing his condition, they grieve: ‘This son is not suited to a mother like Kaikeyi.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| गुन | गुण | virtues |
| देखि | देखकर | having seen |
| दसा | दशा; अवस्था | condition |
| पछिताहीं | दुख करती हैं; खेद करती हैं | grieve; feel regret |
| कैकइ | कैकई | Kaikeyi, Bharata’s mother |
| जननि | माता | mother |
| जोगु | के योग्य; के अनुरूप | suited to; matching |
| सुतु | पुत्र भरत | the son, Bharata |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.223
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 529
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 529, 529
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।