अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भायप भगति भरत आचरनू। कहत सुनत दुख दूषन हरनू।।
मूल पाठ
भायप भगति भरत आचरनू। कहत सुनत दुख दूषन हरनू।।
जो कछु कहब थोर सखि सोई। राम बंधु अस काहे न होई।।
स्रोत अभिलेख 2.223 · पुस्तक पृ. 529, 529
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीका भाईपना, भक्ति और इनके आचरण कहने और सुननेसे दु:ख और दोषोंके हरनेवाले हैं। हे सखी! उनके सम्बन्धमें जो कुछ भी कहा जाय, वह थोड़ा है। श्रीरामचन्द्रजीके भाई ऐसे क्यों न हों?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 529 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भायप भगति भरत आचरनू। कहत सुनत दुख दूषन हरनू।।
English explanation
AI draft interpretation: Recounting and hearing of Bharata’s brotherly love, devotion, and conduct removes sorrow and faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भायप | भाईचारा; भाई के प्रति प्रेम | brotherly affection |
| भगति | भक्ति | devotion |
| भरत | राम के भाई भरत का | of Bharata, Rama’s brother |
| आचरनू | आचरण | conduct |
| कहत | कहने पर | upon recounting |
| सुनत | सुनने पर | upon hearing |
| दुख | दुख | sorrow |
| दूषन | दोष | faults |
| हरनू | हरने वाला | removing |
2 जो कछु कहब थोर सखि सोई। राम बंधु अस काहे न होई।।
English explanation
Friend, whatever I say will fall short. Why would Rama’s brother not be like this?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | whatever |
| कछु | कुछ | anything |
| कहब | मैं कहूँगी | I shall say |
| थोर | थोड़ा; अपर्याप्त | little; insufficient |
| सखि | हे सखी | O friend |
| सोई | वही सब | all that |
| राम | राम के | of Rama |
| बंधु | भाई | brother |
| अस | ऐसे | like this |
| काहे | क्यों | why |
| न | न | not |
| होई | हों | would be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.223
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 529
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 529, 529
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।