अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्वारथु नाथ फिरें सबही का। किएँ रजाइ कोटि बिधि नीका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे नाथ! आपके लौटनेमें सभीका स्वार्थ है, और आपकी आज्ञा पालन करनेमें करोड़ों प्रकारसे कल्याण है। यही स्वार्थ और परमार्थका सार (निचोड़) है, समस्त पुण्योंका फल और सम्पूर्ण शुभ गतियोंका शृङ्गार है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 567 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
स्वारथु नाथ फिरें सबही का। किएँ रजाइ कोटि बिधि नीका।।
यह स्वारथ परमारथ सारु। सकल सुकृत फल सुगति सिंगारु।।
स्रोत अभिलेख 2.268 · पुस्तक पृ. 567, 567
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 स्वारथु नाथ फिरें सबही का। किएँ रजाइ कोटि बिधि नीका।।
English explanation
Lord, everyone’s personal interest lies in your returning; yet obeying your command is better in countless ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वारथु | अपना हित | personal interest |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| फिरें | आपके लौटने पर | in your returning |
| सबही | सभी | everyone |
| का | का | belonging to |
| किएँ | पालन करने पर | by carrying out |
| रजाइ | आज्ञा | your command |
| कोटि | करोड़ों | countless |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| नीका | अच्छा | better |
2 यह स्वारथ परमारथ सारु। सकल सुकृत फल सुगति सिंगारु।।
English explanation
This is the essence of personal and ultimate welfare, the fruit of all virtuous deeds, and the adornment of a blessed destiny.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह; आज्ञापालन | this obedience |
| स्वारथ | अपने हित का | of personal welfare |
| परमारथ | परम हित का | of ultimate welfare |
| सारु | सार | essence |
| सकल | सभी | all |
| सुकृत | पुण्यकर्मों का | of virtuous deeds |
| फल | फल | fruit |
| सुगति | शुभ गति का | of a blessed destiny |
| सिंगारु | शृंगार; शोभा | adornment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.268
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 567
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 567, 567
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।