अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्वामि सुजानु जानि सब ही की। रुचि लालसा रहनि जन जी की।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे स्वामी! आप सुजान हैं, सभीके हृदयकी और मुझ सेवकके मनकी रुचि, लालसा (अभिलाषा) और रहनी जानकर, हे प्रणतपाल! आप सब किसीका पालन करेंंगे और हे देव! दोनों तरफको ओर-अन्ततक निबाहेंगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 606 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
स्वामि सुजानु जानि सब ही की। रुचि लालसा रहनि जन जी की।।
प्रनतपालु पालिहि सब काहू। देउ दुहू दिसि ओर निबाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.314 · पुस्तक पृ. 606, 607
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 स्वामि सुजानु जानि सब ही की। रुचि लालसा रहनि जन जी की।।
English explanation
Wise Lord, knowing everyone's preferences and longings, and the condition of your servant's heart—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वामि | हे स्वामी | O lord |
| सुजानु | भलीभाँति समझने वाले | wise and discerning |
| जानि | जानकर | knowing |
| सब | सब | everyone |
| ही | ही, सभी पर बल | indeed; emphasizing all |
| की | की | of |
| रुचि | रुचि, इच्छा | preference |
| लालसा | अभिलाषा | longing |
| रहनि | दशा, स्थिति | condition |
| जन | सेवक की | of your servant |
| जी | मन | heart |
| की | की | of |
2 प्रनतपालु पालिहि सब काहू। देउ दुहू दिसि ओर निबाहू।।
English explanation
Protector of those who seek refuge, care for everyone; Lord, sustain both sides to the end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रनतपालु | शरणागतों के पालक | protector of those seeking refuge |
| पालिहि | पालन कीजिए | please care for |
| सब | सब | all |
| काहू | हर किसी का | everyone |
| देउ | हे देव | O Lord |
| दुहू | दोनों | both |
| दिसि | दिशाओं, पक्षों में | on the sides |
| ओर | अंत तक | to the end |
| निबाहू | निर्वाह कीजिए | please sustain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.314
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 606
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद,पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 606, 607
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।