अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुरजन परिजन प्रजा गोसाई। सब सुचि सरस सनेहँ सगाई।।
मूल पाठ
पुरजन परिजन प्रजा गोसाई। सब सुचि सरस सनेहँ सगाई।।
राउर बदि भल भव दुख दाहू। प्रभु बिनु बादि परम पद लाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.314 · पुस्तक पृ. 606, 607
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे गोसाईं! आपके प्रेम और सम्बन्धसे अवधपुरवासी, कुटुम्बी और प्रजा सभी पवित्र और रस (आनन्द) से युक्त हैं। आपके लिये भवदु:ख (जन्म-मरणके दु:ख) की ज्वालामें जलना भी अच्छा है और प्रभु (आप) के बिना परमपद (मोक्ष) का लाभ भी व्यर्थ है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 606 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुरजन परिजन प्रजा गोसाई। सब सुचि सरस सनेहँ सगाई।।
English explanation
AI-draft meaning: Lord, the townspeople, family members, and subjects all share a pure, sweet, loving bond with you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरजन | नगर के निवासी | townspeople |
| परिजन | परिवार और निकट संबंधी | family and close relations |
| प्रजा | राज्य की प्रजा | the subjects |
| गोसाई | हे स्वामी | O lord |
| सब | सभी का | of all |
| सुचि | पवित्र | pure |
| सरस | मधुर, रसपूर्ण | sweet and warm |
| सनेहँ | स्नेह से | through affection |
| सगाई | संबंध | relationship |
2 राउर बदि भल भव दुख दाहू। प्रभु बिनु बादि परम पद लाहू।।
English explanation
Even the burning pain of worldly existence is preferable to losing you; Lord, attaining the highest state without you is futile.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राउर | आपके | you; your |
| बदि | बदले में | in exchange for |
| भल | भला, स्वीकार्य | preferable, acceptable |
| भव | संसार के | of worldly existence |
| दुख | दुखों की | of suffering |
| दाहू | जलन, संताप | burning anguish |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| बिनु | बिना | without |
| बादि | व्यर्थ | futile |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| पद | पद, मुक्ति की अवस्था | state of liberation |
| लाहू | प्राप्ति | attainment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.314
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 606
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद,पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 606, 607
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।