अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सुनि तिय रिस गयउ सुखाई। देखहु काम प्रताप बड़ाई।।
मूल पाठ
सो सुनि तिय रिस गयउ सुखाई। देखहु काम प्रताप बड़ाई।।
सूल कुलिस असि अँगवनिहारे। ते रतिनाथ सुमन सर मारे।।
स्रोत अभिलेख 2.25 · पुस्तक पृ. 364, 364
भावार्थ
मूल पाठ के बादवही राजा दशरथ स्त्रीका क्रोध सुनकर सूख गये। कामदेवका प्रताप और महिमा तो देखिये। जो त्रिशूल, वज्र और तलवार आदिकी चोट अपने अङ्गोंपर सहनेवाले हैं, वे रतिनाथ कामदेवके पुष्पबाणसे मारे गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 364 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सो सुनि तिय रिस गयउ सुखाई। देखहु काम प्रताप बड़ाई।।
English explanation
That very king withered on hearing of his wife's anger. Behold how great the power of desire is!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही राजा | that very king |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| तिय | पत्नी कैकेयी का | of his wife Kaikeyi |
| रिस | क्रोध | anger |
| गयउ | हो गए | became |
| सुखाई | सूखकर निस्तेज | withered and drained |
| देखहु | देखो | behold |
| काम | काम, प्रेमासक्ति | desire or amorous attachment |
| प्रताप | प्रभाव | power |
| बड़ाई | महत्ता, प्रबलता | greatness or potency |
2 सूल कुलिस असि अँगवनिहारे। ते रतिनाथ सुमन सर मारे।।
English explanation
He who could withstand the trident, thunderbolt, and sword was struck down by the flower-arrows of Kama, Rati's husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सूल | त्रिशूल के प्रहार | blows of the trident |
| कुलिस | वज्र के प्रहार | blows of the thunderbolt |
| असि | तलवार के प्रहार | blows of the sword |
| अँगवनिहारे | सहने वाले | one able to withstand |
| ते | उन्हीं को | that very man |
| रतिनाथ | रति के पति कामदेव ने | Kama, husband of Rati |
| सुमन | फूलों के | of flowers |
| सर | बाणों से | with arrows |
| मारे | मार दिया | struck down |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 364
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 364, 364
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।