अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोपभवन सुनि सकुचेउ राउ। भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ।।
मूल पाठ
कोपभवन सुनि सकुचेउ राउ। भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ।।
सुरपति बसइ बाहँबल जाके। नरपति सकल रहहिं रुख ताकें।।
स्रोत अभिलेख 2.25 · पुस्तक पृ. 364, 364
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोपभवनका नाम सुनकर राजा सहम गये। डरके मारे उनका पाँव आगेको नहीं पड़ता। स्वयं देवराज इन्द्र जिनकी भुजाओंके बलपर [राक्षसोंसे निर्भय होकर] बसता है और सम्पूर्ण राजालोग जिनका रुख देखते रहते हैं,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 364 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कोपभवन सुनि सकुचेउ राउ। भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ।।
English explanation
Hearing that Kaikeyi was in the chamber of anger, King Dasharatha shrank back. Overcome by fear, he could not take a step forward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोपभवन | रूठकर रहने का कक्ष | chamber for withdrawing in anger |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सकुचेउ | सहम गए | shrank back in apprehension |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| भय | भय के | of fear |
| बस | वश में | under the sway |
| अगहुड़ | आगे | forward |
| परइ | पड़ता है | falls or steps |
| न | नहीं | not |
| पाऊ | पैर | foot |
2 सुरपति बसइ बाहँबल जाके। नरपति सकल रहहिं रुख ताकें।।
English explanation
He whose strength of arms holds even Indra under its sway, and whose wishes all kings wait upon—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरपति | देवताओं के राजा इंद्र | Indra, king of the gods |
| बसइ | वश में रहते हैं | remains under the sway |
| बाहँबल | बाँहों के बल के | of the strength of arms |
| जाके | जिनके | whose |
| नरपति | राजा | kings |
| सकल | सभी | all |
| रहहिं | रहते हैं | remain |
| रुख | इच्छा या संकेत | wishes or indications |
| ताकें | देखते हुए, प्रतीक्षा करते हुए | watching for, waiting upon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 364
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 364, 364
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।