अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो मति मोरि भरत महिमाही। कहै काह छलि छुअति न छाँही।।
मूल पाठ
सो मति मोरि भरत महिमाही। कहै काह छलि छुअति न छाँही।।
बिधि गनपति अहिपति सिव सारद। कबि कोबिद बुध बुद्धि बिसारद।।
स्रोत अभिलेख 2.288 · पुस्तक पृ. 584, 585
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह (धर्म, राजनीति और ब्रह्मज्ञानमें प्रवेश रखनेवाली) मेरी बुद्धि भरतजीकी महिमाका वर्णन तो क्या करे, छल करके भी उसकी छायातकको नहीं छू पाती! ब्रह्माजी, गणेशजी, शेषजी, महादेवजी, सरस्वतीजी, कवि, ज्ञानी, पण्डित और बुद्धिमान्—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 584 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सो मति मोरि भरत महिमाही। कहै काह छलि छुअति न छाँही।।
English explanation
What could that understanding of mine say of Bharata’s greatness? Even through artifice, it cannot touch its shadow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही | that same |
| मति | बुद्धि | understanding |
| मोरि | मेरी | my |
| भरत | भरत की | of Bharata |
| महिमाही | महिमा को | greatness |
| कहै | कह सके | could describe |
| काह | क्या | what |
| छलि | छल करके | through artifice |
| छुअति | छूती है | touches |
| न | नहीं | not |
| छाँही | छाया भी | even the shadow |
2 बिधि गनपति अहिपति सिव सारद। कबि कोबिद बुध बुद्धि बिसारद।।
English explanation
Brahma, Ganesha, Shesha, Shiva, Sarasvati, and poets, scholars, and sages accomplished in intellect—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधि | ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता | Brahma, the creator |
| गनपति | गणेश | Ganesha, lord of the hosts |
| अहिपति | शेषनाग, नागों के स्वामी | Shesha, lord of serpents |
| सिव | शिव | Shiva |
| सारद | सरस्वती, विद्या की देवी | Sarasvati, goddess of learning |
| कबि | कवि | poets |
| कोबिद | विद्वान | learned scholars |
| बुध | ज्ञानी | wise people |
| बुद्धि | बुद्धि में | in intellect |
| बिसारद | निपुण | accomplished |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.288
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 584
- सहायक विषय
- जनक-सुनयना-संवाद, भरतजीकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 584, 585
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।