अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोच बिकल मग परइ न पाऊ। रामहि बोलि कहिहि का राऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसुमन्त्र सोचसे व्याकुल हैं, रास्तेपर पैर नहीं पड़ता (आगे बढ़ा नहीं जाता), [सोचते हैं—] रामजीको बुलाकर राजा क्या कहेंगे? किसी तरह हृदयमें धीरज धरकर वे द्वारपर गये। सब लोग उनको मनमारे (उदास) देखकर पूछने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 376 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोच बिकल मग परइ न पाऊ। रामहि बोलि कहिहि का राऊ।।
उर धरि धीरजु गयउ दुआरें। पूछँहिं सकल देखि मनु मारें।।
स्रोत अभिलेख 2.39 · पुस्तक पृ. 376, 376
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोच बिकल मग परइ न पाऊ। रामहि बोलि कहिहि का राऊ।।
English explanation
Distraught with worry, Sumantra could hardly move his feet along the road. He wondered: What will the king say after summoning Rama?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोच | चिंता से | with worry |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| मग | मार्ग में | on the road |
| परइ | पड़ता; आगे बढ़ता | falls; moves forward |
| न | नहीं | not |
| पाऊ | पाँव | foot |
| रामहि | राम को | Rama |
| बोलि | बुलाकर | having summoned |
| कहिहि | कहेंगे | will say |
| का | क्या | what |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
2 उर धरि धीरजु गयउ दुआरें। पूछँहिं सकल देखि मनु मारें।।
English explanation
Steadying his heart, Sumantra reached Rama’s doorway. Seeing him dejected, everyone began asking questions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | हृदय में | in the heart |
| धरि | रखकर | having held |
| धीरजु | धैर्य | composure |
| गयउ | गए; पहुँचे | went; reached |
| दुआरें | द्वार पर | at the doorway |
| पूछँहिं | पूछते हैं | ask |
| सकल | सब लोग | everyone |
| देखि | देखकर | seeing |
| मनु | मन | spirits; mind |
| मारें | दबा हुआ; उदास | downcast; dejected |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 376
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 376, 376
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।