अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समाधानु करि सो सबही का। गयउ जहाँ दिनकर कुल टीका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसब लोगोंका समाधान करके (किसी तरह समझा-बुझाकर) सुमन्त्र वहाँ गये, जहाँ सूर्यकुलके तिलक श्रीरामचन्द्रजी थे। श्रीरामचन्द्रजीने सुमन्त्रको आते देखा तो पिताके समान समझकर उनका आदर किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 376 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
समाधानु करि सो सबही का। गयउ जहाँ दिनकर कुल टीका।।
रामु सुमंत्रहि आवत देखा। आदरु कीन्ह पिता सम लेखा।।
स्रोत अभिलेख 2.39 · पुस्तक पृ. 376, 376
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 समाधानु करि सो सबही का। गयउ जहाँ दिनकर कुल टीका।।
English explanation
After reassuring them all, Sumantra went to where Rama, the glory of the solar dynasty, was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समाधानु | शंका का निवारण; आश्वासन | reassurance; resolution of doubts |
| करि | करके | having given; having done |
| सो | वे सुमंत्र | he, Sumantra |
| सबही | सभी | all of them |
| का | का | of; for |
| गयउ | गए | went |
| जहाँ | जहाँ | where |
| दिनकर | सूर्य | the sun |
| कुल | वंश | dynasty |
| टीका | गौरव-चिह्न; राम | crowning glory, Rama |
2 रामु सुमंत्रहि आवत देखा। आदरु कीन्ह पिता सम लेखा।।
English explanation
Rama saw Sumantra approaching and honored him, regarding him as equal to his father.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम ने | Rama |
| सुमंत्रहि | सुमंत्र को | Sumantra |
| आवत | आते हुए | approaching |
| देखा | देखा | saw |
| आदरु | सम्मान | honor |
| कीन्ह | किया | gave; performed |
| पिता | पिता के | his father |
| सम | समान | equal to; like |
| लेखा | माना | regarded |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 376
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 376, 376
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।