अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निरखि बदनु कहि भूप रजाई। रघुकुलदीपहि चलेउ लेवाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीके मुखको देखकर और राजाकी आज्ञा सुनाकर वे रघुकुलके दीपक श्रीरामचन्द्रजीको [अपने साथ] लिवा चले। श्रीरामचन्द्रजी मन्त्रीके साथ बुरी तरहसे (बिना किसी लवाजमेके) जा रहे हैं, यह देखकर लोग जहाँ-तहाँ विषाद कर रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 376 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निरखि बदनु कहि भूप रजाई। रघुकुलदीपहि चलेउ लेवाई।।
रामु कुभाँति सचिव सँग जाहीं। देखि लोग जहँ तहँ बिलखाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.39 · पुस्तक पृ. 376, 376
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निरखि बदनु कहि भूप रजाई। रघुकुलदीपहि चलेउ लेवाई।।
English explanation
After looking at Rama’s face and conveying the king’s command, Sumantra set out with Rama, the light of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निरखि | देखकर | having looked at |
| बदनु | मुख | face |
| कहि | कहकर; बताकर | having conveyed |
| भूप | राजा की | the king’s |
| रजाई | आज्ञा | command |
| रघुकुलदीपहि | रघुवंश के दीपक राम को | Rama, the light of Raghu’s lineage |
| चलेउ | चले | set out |
| लेवाई | साथ लेकर | taking along |
2 रामु कुभाँति सचिव सँग जाहीं। देखि लोग जहँ तहँ बिलखाहीं।।
English explanation
Rama went with the minister in unsettling, unusual circumstances. Seeing this, people here and there began to lament.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| कुभाँति | असामान्य, अशुभ-से ढंग से | in an unsettling, unusual manner |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र | the minister Sumantra |
| सँग | के साथ | with |
| जाहीं | जा रहे हैं | are going |
| देखि | देखकर | seeing |
| लोग | लोग | people |
| जहँ | जहाँ | here |
| तहँ | तहाँ; वहाँ | there |
| बिलखाहीं | बिलखते हैं | lament; weep bitterly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 376
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 376, 376
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।