अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोचिअ बयसु कृपन धनवानू। जो न अतिथि सिव भगति सुजानू।।
मूल पाठ
सोचिअ बयसु कृपन धनवानू। जो न अतिथि सिव भगति सुजानू।।
सोचिअ सूद्रु बिप्र अवमानी। मुखर मानप्रिय ग्यान गुमानी।।
स्रोत अभिलेख 2.172 · पुस्तक पृ. 486, 486
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस वैश्यका सोच करना चाहिये जो धनवान् होकर भी कंजूस है, और जो अतिथिसत्कार तथा शिवजीकी भक्ति करनेमें कुशल नहीं है। उस शूद्रका सोच करना चाहिये जो ब्राह्मणोंका अपमान करनेवाला, बहुत बोलनेवाला, मान-बड़ाई चाहनेवाला और ज्ञानका घमंड रखनेवाला है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 486 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोचिअ बयसु कृपन धनवानू। जो न अतिथि सिव भगति सुजानू।।
English explanation
One should lament the wealthy but miserly Vaishya who is not versed in hospitality and devotion to Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोचिअ | शोक करना चाहिए | one should lament |
| बयसु | वैश्य | a Vaishya, of the traditional merchant class |
| कृपन | कंजूस | miserly |
| धनवानू | धनवान | wealthy |
| जो | जो | who |
| न | नहीं | not |
| अतिथि | अतिथि-सत्कार में | in hospitality to guests |
| सिव | शिव की | to Shiva |
| भगति | भक्ति में | in devotion |
| सुजानू | कुशल और जानकार | well versed |
2 सोचिअ सूद्रु बिप्र अवमानी। मुखर मानप्रिय ग्यान गुमानी।।
English explanation
One should lament the Shudra who disrespects Brahmins, is loudmouthed, craves honor, and is proud of his knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोचिअ | शोक करना चाहिए | one should lament |
| सूद्रु | शूद्र | a Shudra, of the traditional service class |
| बिप्र | ब्राह्मण का | of Brahmins |
| अवमानी | अपमान करने वाला | disrespectful |
| मुखर | वाचाल और उद्दंड बोलने वाला | loudmouthed |
| मानप्रिय | सम्मान पाने का इच्छुक | fond of being honored |
| ग्यान | अपने ज्ञान का | of his knowledge |
| गुमानी | घमंड करने वाला | proud |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.172
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 486
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 486, 486
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।