अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोचिअ पुनि पति बंचक नारी। कुटिल कलहप्रिय इच्छाचारी।।
मूल पाठ
सोचिअ पुनि पति बंचक नारी। कुटिल कलहप्रिय इच्छाचारी।।
सोचिअ बटु निज ब्रतु परिहरई। जो नहिं गुर आयसु अनुसरई।।
स्रोत अभिलेख 2.172 · पुस्तक पृ. 486, 486
भावार्थ
मूल पाठ के बादपुन: उस स्त्रीका सोच करना चाहिये जो पतिको छलनेवाली, कुटिल, कलहप्रिय और स्वेच्छाचारिणी है। उस ब्रह्मचारीका सोच करना चाहिये जो अपने ब्रह्मचर्य-व्रतको छोड़ देता है और गुरुकी आज्ञाके अनुसार नहीं चलता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 486 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोचिअ पुनि पति बंचक नारी। कुटिल कलहप्रिय इच्छाचारी।।
English explanation
One should also lament the woman who deceives her husband, is deceitful, loves quarrels, and acts solely as she pleases.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोचिअ | शोक करना चाहिए | one should lament |
| पुनि | फिर, भी | also, furthermore |
| पति | पति को | her husband |
| बंचक | धोखा देने वाली | deceiving |
| नारी | स्त्री | the woman |
| कुटिल | कुटिल | deceitful |
| कलहप्रिय | झगड़ा पसंद करने वाली | fond of quarrels |
| इच्छाचारी | मनमानी करने वाली | acting solely as she pleases |
2 सोचिअ बटु निज ब्रतु परिहरई। जो नहिं गुर आयसु अनुसरई।।
English explanation
One should lament the celibate student who abandons his vows and does not follow his teacher’s instructions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोचिअ | शोक करना चाहिए | one should lament |
| बटु | ब्रह्मचारी विद्यार्थी | a celibate religious student |
| निज | अपना | his own |
| ब्रतु | व्रत और अनुशासन | vows and discipline |
| परिहरई | छोड़ देता है | abandons |
| जो | जो | who |
| नहिं | नहीं | not |
| गुर | गुरु की | his teacher’s |
| आयसु | आज्ञा | instructions |
| अनुसरई | पालन करता है | follows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.172
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 486
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 486, 486
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।