अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोचनीय नहिं कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।
मूल पाठ
सोचनीय नहिं कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।
भयउ न अहइ न अब होनिहारा। भूप भरत जस पिता तुम्हारा।।
स्रोत अभिलेख 2.173 · पुस्तक पृ. 487, 487
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोसलराज दशरथजी सोच करनेयोग्य नहीं हैं, जिनका प्रभाव चौदहों लोकोंमें प्रकट है। हे भरत! तुम्हारे पिता-जैसा राजा तो न हुआ, न है और न अब होनेका ही है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 487 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोचनीय नहिं कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।
English explanation
Dasharatha, king of Kosala, is not to be lamented; his glory is renowned throughout the fourteen worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोचनीय | शोक के योग्य | deserving lament |
| नहिं | नहीं | not |
| कोसलराऊ | कोसल के राजा दशरथ | Dasharatha, king of Kosala |
| भुवन | लोकों में | in the worlds |
| चारिदस | चौदह | fourteen |
| प्रगट | प्रसिद्ध | renowned |
| प्रभाऊ | प्रताप | glory and might |
2 भयउ न अहइ न अब होनिहारा। भूप भरत जस पिता तुम्हारा।।
English explanation
Bharata, no king like your father has existed, exists now, or will exist hereafter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हुआ | has existed |
| न | नहीं | not |
| अहइ | है | exists |
| न | नहीं | not |
| अब | अब आगे | hereafter |
| होनिहारा | होने वाला | will exist |
| भूप | राजा | king |
| भरत | हे भरत | O Bharata |
| जस | जैसा | like |
| पिता | पिता | father |
| तुम्हारा | तुम्हारे | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.173
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 487
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 487, 487
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।