अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब बिधि सोचिअ पर अपकारी। निज तनु पोषक निरदय भारी।।
मूल पाठ
सब बिधि सोचिअ पर अपकारी। निज तनु पोषक निरदय भारी।।
सोचनीय सबहि बिधि सोई। जो न छाड़ि छलु हरि जन होई।।
स्रोत अभिलेख 2.173 · पुस्तक पृ. 487, 487
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब प्रकारसे उसका सोच करना चाहिये जो दूसरोंका अनिष्ट करता है, अपने ही शरीरका पोषण करता है और बड़ा भारी निर्दयी है। और वह तो सभी प्रकारसे सोच करनेयोग्य है जो छल छोड़कर हरिका भक्त नहीं होता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 487 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब बिधि सोचिअ पर अपकारी। निज तनु पोषक निरदय भारी।।
English explanation
The person who harms others, cares only for their own body, and is exceedingly cruel deserves lament in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | way |
| सोचिअ | शोक करना चाहिए | should be lamented |
| पर | दूसरों का | to others |
| अपकारी | अहित करने वाला | one who does harm |
| निज | अपने | one's own |
| तनु | शरीर का | body |
| पोषक | पोषण करने वाला | one who nourishes |
| निरदय | निर्दयी | cruel |
| भारी | अत्यंत | exceedingly |
2 सोचनीय सबहि बिधि सोई। जो न छाड़ि छलु हरि जन होई।।
English explanation
That person deserves lament in every way who does not abandon deceit and become a devotee of Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोचनीय | शोक के योग्य | deserving lament |
| सबहि | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | way |
| सोई | वही व्यक्ति | that very person |
| जो | जो | who |
| न | नहीं | not |
| छाड़ि | छोड़कर | having abandoned |
| छलु | छल-कपट | deceit |
| हरि | भगवान हरि का | of Lord Hari |
| जन | भक्त | devotee |
| होई | बनता है | becomes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.173
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 487
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 487, 487
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