अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोक बिकल दोउ राज समाजा। रहा न ग्यानु न धीरजु लाजा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददोनों राजसमाज शोकसे व्याकुल हो गये। किसीको न ज्ञान रहा, न धीरज और न लाज ही रही। राजा दशरथजीके रूप, गुण और शीलकी सराहना करते हुए सब रो रहे हैं और शोकसमुद्रमें डुबकी लगा रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 574 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोक बिकल दोउ राज समाजा। रहा न ग्यानु न धीरजु लाजा।।
भूप रूप गुन सील सराही। रोवहिं सोक सिंधु अवगाही।।
स्रोत अभिलेख 2.276 · पुस्तक पृ. 573, 574
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोक बिकल दोउ राज समाजा। रहा न ग्यानु न धीरजु लाजा।।
English explanation
Both royal gatherings were distraught with grief; neither discernment, fortitude, nor reserve remained.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोक | शोक से | with grief |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| दोउ | दोनों | both |
| राज | राजाओं के | royal |
| समाजा | समाज; साथ आए जनसमूह | gatherings; entourages |
| रहा | रह गया | remained |
| न | नहीं | not |
| ग्यानु | ज्ञान; विवेक | discernment |
| न | न ही | nor |
| धीरजु | धैर्य | fortitude |
| लाजा | लाज; संकोच | reserve; restraint |
2 भूप रूप गुन सील सराही। रोवहिं सोक सिंधु अवगाही।।
English explanation
Praising King Dasharatha’s appearance, virtues, and character, they weep, immersed in the ocean of grief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा दशरथ के | of King Dasharatha |
| रूप | रूप; सुंदरता | appearance; beauty |
| गुन | गुण | virtues |
| सील | शील; सदाचरण | character; good conduct |
| सराही | प्रशंसा करके | praising |
| रोवहिं | रोते हैं | weep |
| सोक | शोक रूपी | of grief |
| सिंधु | समुद्र | ocean |
| अवगाही | डूबकर; निमग्न होकर | immersed in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.276
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 574
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 573, 574
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।